कीमत साढ़े चार करोड़ की मशीनों का किराया भर दिया 18 करोड़
नई दिल्ली : इसे प्रशासनिक अनदेखी कहें या सरकारी अदूरदर्शिता.. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में धन की बर्बादी का बड़ा मामला सामने आया है। जिन मशीनों की कीमत ही महज करीब 4.5 करोड़ बैठती है, उनका लगभग 18 करोड़ रुपये किराया भरा जा चुका है। चार गुना पैसा चुकाने के बाद भी ये मशीनें न खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की हैं, न सरकार की और न ही राशन दुकानदारों की। मामले को लेकर दिल्ली के पूर्व खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन ने जहां व्यस्तता का हवाला देते हुए बात नहीं की, वहीं मौजूदा खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कई बार मिलाने पर भी फोन नहीं उठाया।
कोरोना काल के बाद फरवरी, 2021 में दिल्ली सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने इलेक्ट्रानिक प्वाइंट आफ सेल (ईपीओएस) मशीन के लिए टेंडर निकाला था। दिल्ली में राशन की करीब दो हजार दुकानें हैं। हर दुकान के लिए इसका इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया। इस मशीन की मदद से लाभार्थी की पहचान प्रामाणिक ढंग से की जा सकती है। एक मशीन की कीमत
• कोरोना काल के बाद दिल्ली की करीब 2,000 राशन की दुकानों के लिए किराए पर ली गई ईपीओएस मशीनें
• एक मशीन का मासिक किराया 1,844 रुपये, जबकि कीमत है 22 हजार के आसपास
किराये पर ईपीओएस मशीनें
की लेना सीधे तौर पर जनता के धन बर्बादी है। इस पर भी इन मशीनों के रखरखाव का खर्च राशन दुकानदारों को ही वहन करना पड़ता है, जिसकी उन्हें निजी कंपनी से कोई रसीद तक नहीं मिलती। हैरानी की बात यह कि सरकारी पैसे की बर्बादी तो की जा रही है जबकि दुकानदारों को उनका हक यानी मार्जिन मनी सात माह से नहीं मिल रही।
शिव कुमार गर्ग, अध्यक्ष, दिल्ली सरकारी राशन डीलर्स संघ
उसकी गुणवत्ता के अनुरूप 20 से 30 हजार रुपये के करीब है। लेकिन विभाग ने इन मशीनों की खरीद न कर भारत इलेक्ट्रानिक लिमिटेड (बेल) से 2,100 मशीनें (एक सौ अतिरिक्त) किराये पर ले लीं। एक मशीन का किराया प्रतिमाह 1,844 रुपये तय हुआ और अनुबंध .
दिल्ली में 2021 में सभी राशन की दुकानों पर ईपीओएस का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया। मशीनों के रखरखाव की जिम्मेदारी विजन टेक कंपनी को दिया गया। खराबी आने पर दुकानदार को खर्च वहन करना पड़ता था लेकिन रसीद नहीं दी जाती थी.
बताया जाता है कि जुलाई 2021 से राशन की सभी दुकानों पर ईपीओएस मशीनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया। हैरत की बात यह कि बेल ने इन मशीनों का रखरखाव आगे विजन टेक कंपनी को दे दिया। अब अगर किसी भी
राशन दुकानदार को मशीन में कोई परेशानी आती है तो विजन टेक कंपनी के इंजीनियर ठीक करते हैं। सारा खर्चा दुकानदार को ही वहन करना होता है। दुकानदारों की शिकायत है कि उन्हें विजन टेक से न कोई रसीद मिलती है और न ही इंजीनियरों का पूरा सहयोग।
बताया जाता है कि अभी तक लगभग चार सालों में इन 2,100 मशीनों के किराये के तौर पर करीब 18 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। चार गुना अधिक भुगतान के बावजूद मशीनें अभी बेल की ही हैं। नए आदेश के अनुसार, अब ईपीओएस मशीनों को माप तोल की मशीन से भी जोड़ने को बोल दिया गया है। राशन दुकानदारों की शिकायत 'है कि आए दिन नए नए फरमान जारी कर दिए जाते हैं, सरकारी धन का दुरुपयोग किया जाता है। वहीं, दुकानदारों को उनकी मार्जिन मनी भी पिछले सात माह से नहीं दी गई है। इस संदर्भ में 29 अक्टूबर, 2024 को सांसद योगेंद्र चांदोलिया ने भी एलजी वीके सक्सेना को मामले की जांच के लिए पत्र लिखा था, लेकिन अभी तक इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
नई दिल्ली : इसे प्रशासनिक अनदेखी कहें या सरकारी अदूरदर्शिता.. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में धन की बर्बादी का बड़ा मामला सामने आया है। जिन मशीनों की कीमत ही महज करीब 4.5 करोड़ बैठती है, उनका लगभग 18 करोड़ रुपये किराया भरा जा चुका है। चार गुना पैसा चुकाने के बाद भी ये मशीनें न खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की हैं, न सरकार की और न ही राशन दुकानदारों की। मामले को लेकर दिल्ली के पूर्व खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन ने जहां व्यस्तता का हवाला देते हुए बात नहीं की, वहीं मौजूदा खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कई बार मिलाने पर भी फोन नहीं उठाया।
कोरोना काल के बाद फरवरी, 2021 में दिल्ली सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने इलेक्ट्रानिक प्वाइंट आफ सेल (ईपीओएस) मशीन के लिए टेंडर निकाला था। दिल्ली में राशन की करीब दो हजार दुकानें हैं। हर दुकान के लिए इसका इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया। इस मशीन की मदद से लाभार्थी की पहचान प्रामाणिक ढंग से की जा सकती है। एक मशीन की कीमत
• कोरोना काल के बाद दिल्ली की करीब 2,000 राशन की दुकानों के लिए किराए पर ली गई ईपीओएस मशीनें
• एक मशीन का मासिक किराया 1,844 रुपये, जबकि कीमत है 22 हजार के आसपास
किराये पर ईपीओएस मशीनें
की लेना सीधे तौर पर जनता के धन बर्बादी है। इस पर भी इन मशीनों के रखरखाव का खर्च राशन दुकानदारों को ही वहन करना पड़ता है, जिसकी उन्हें निजी कंपनी से कोई रसीद तक नहीं मिलती। हैरानी की बात यह कि सरकारी पैसे की बर्बादी तो की जा रही है जबकि दुकानदारों को उनका हक यानी मार्जिन मनी सात माह से नहीं मिल रही।
शिव कुमार गर्ग, अध्यक्ष, दिल्ली सरकारी राशन डीलर्स संघ
उसकी गुणवत्ता के अनुरूप 20 से 30 हजार रुपये के करीब है। लेकिन विभाग ने इन मशीनों की खरीद न कर भारत इलेक्ट्रानिक लिमिटेड (बेल) से 2,100 मशीनें (एक सौ अतिरिक्त) किराये पर ले लीं। एक मशीन का किराया प्रतिमाह 1,844 रुपये तय हुआ और अनुबंध .
दिल्ली में 2021 में सभी राशन की दुकानों पर ईपीओएस का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया। मशीनों के रखरखाव की जिम्मेदारी विजन टेक कंपनी को दिया गया। खराबी आने पर दुकानदार को खर्च वहन करना पड़ता था लेकिन रसीद नहीं दी जाती थी.
बताया जाता है कि जुलाई 2021 से राशन की सभी दुकानों पर ईपीओएस मशीनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया। हैरत की बात यह कि बेल ने इन मशीनों का रखरखाव आगे विजन टेक कंपनी को दे दिया। अब अगर किसी भी
राशन दुकानदार को मशीन में कोई परेशानी आती है तो विजन टेक कंपनी के इंजीनियर ठीक करते हैं। सारा खर्चा दुकानदार को ही वहन करना होता है। दुकानदारों की शिकायत है कि उन्हें विजन टेक से न कोई रसीद मिलती है और न ही इंजीनियरों का पूरा सहयोग।
बताया जाता है कि अभी तक लगभग चार सालों में इन 2,100 मशीनों के किराये के तौर पर करीब 18 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। चार गुना अधिक भुगतान के बावजूद मशीनें अभी बेल की ही हैं। नए आदेश के अनुसार, अब ईपीओएस मशीनों को माप तोल की मशीन से भी जोड़ने को बोल दिया गया है। राशन दुकानदारों की शिकायत 'है कि आए दिन नए नए फरमान जारी कर दिए जाते हैं, सरकारी धन का दुरुपयोग किया जाता है। वहीं, दुकानदारों को उनकी मार्जिन मनी भी पिछले सात माह से नहीं दी गई है। इस संदर्भ में 29 अक्टूबर, 2024 को सांसद योगेंद्र चांदोलिया ने भी एलजी वीके सक्सेना को मामले की जांच के लिए पत्र लिखा था, लेकिन अभी तक इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।