कृषि व किसान विरोधी आंदोलन वापस लेने केI मांग

 



बस्ती, 04 दिसम्बर 20
कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आन्दोलन का समर्थन करते हुये राष्ट्रीय लोकदल ने जिलाध्यक्ष राधेश्याम चौधरी के नेतृत्व में राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन को सौंपा। ज्ञापन में किसान विरोध कानूनों को वापस लेने की मांग की गयी है। कहा गया है कि किसानों ने सदैव देश की अर्थव्यवस्था में अपना महत्वपूर्ण योगदान किया है।



कोरोना जैसी वैश्विक महामारी और लाँक डाउन के कठिन दौर में भी किसानों द्वारा उत्पादन करके अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण सहयोग दिया गया। केन्द्र सरकार द्वारा कृषि सम्बन्धी ऐसे कानून पारित किये गये हैं जिनके लागू होने से किसानों की स्थिति सोचनीय ही नहीं बल्कि दयनीय हो जायेगी। आज देश का किसान अपनी सम्भावित परेशानियों से आशंकित होकर आन्दोलित है, किसान जब अपनी आवाज़ सुनाने दिल्ली आया तो इस भयंकर ठंड में सड़क पर पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले दागे जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।                              

रालोद नेताओं का कहना है कि किसान विरोधी कानूनों के फलस्वरूप मण्डी समिति और एम0एस0पी0 समाप्त हो जायेगी तथा कार्पोरेट जगत की स्वेच्छा से दी जाने वाली कीमत पर कृषि उपज की खरीद होगी तथा पूंजीपतियों और किसानों के बीच सम्भावित विवादों का निस्तारण भी सिविल कोर्ट में न होने से किसानों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन होगा। इकरारनामा के माध्यम से किसानों का शोषण होगा और तैयार फसलों की कीमत गुणवत्ता के बहाने कम मिल पायेगी।

भण्डारण की सीमा कार्पोरेट जगत के पक्ष में समाप्त हो जायेगी जिसका लाभ किसानों को न मिलकर सीधे पूंजीपतियों को मिलेगा साथ ही इसका दुष्प्रभाव आम जनता पर पड़ेगा। राष्ट्रीय लोकदल किसी कीमत पर उेसे कानून बर्दाश्त नही करेगा। ज्ञापन में केन्द्र सरकार को आदेश देकर कानून को वापस लेने की माग की गयी है। ज्ञापन सौंपने वालों में ओमप्रकाश चौधरी, राय अंकुरम श्रीवास्तव, शिवकुमार गौतम, इन्द्रबहादुर यादव, सुजीत कुमार शुक्ला, जनार्दन चौधरी, शेर सिंह, अतुल सिंह, मनीष सिंह, बब्बू खान आदि शामिल थे।

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